
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड मजदूर एकता यूनियन का पहला राज्य सम्मेलन सीटू कार्यालय हमीरपुर में हुआ। सम्मेलन का शुभारंभ सीटू के राज्य सचिव डा. कश्मीर सिंह ठाकुर ने किया। इसमें सम्मेलन में पहुंचे सभी प्रतिनिधियों ने बिजली बोर्ड में कार्यरत कांट्रेक्ट वर्करों को रेगुलर करने की मांग उठाई।
डा. कश्मीर ने कहा कि वर्तमान में सरकार राज्य की हो या केंद्र की, उदारवादी निजीकरण के रास्ते पर चल रही हैं। यह देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण नहीं होना चाहिए। वर्ष 2003 में देशभर के बिजली बोर्ड का विघटन कर केंद्र की एनडीए सरकार ने कानून पास कर निजीकरण की नींव रखी थी। दिल्ली जैसे प्रदेश में सबसे पहले निजीकरण किया गया। वहां आज जनता बिजली की दरों से बेहाल हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश जिसे विद्युत राज्य कहा जाता है, यहां भी बिजली महंगी दरों पर मिल रही है। इनकी दरों को चुकाना आम आदमी के वश से बाहर होता जा रहा है। निजीकरण से ठेकों पर रखे मजदूरों का शोषण हो रहा है। उन्हें दिन भर मजदूरी करने के बावजूद न्यूनतम मानदेय नहीं मिल रहा है।
सम्मेलन में सीटू जिलाध्यक्ष जोगेंद्र कुमार, जिला सचिव प्रताप राणा और अनिल मनकोटिया विशेष रूप से मौजूद रहे।
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पवन को सौंपी प्रदेशाध्यक्ष की कमान
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड मजदूर एकता यूनियन की 25 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया। पवन कुमार को प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। हमीरपुर के यशपाल को महासचिव चुना गया। सम्मेलन में गोल्डी कौंडल, ललित शर्मा, अश्वनी, ज्ञान चंद को उपाध्यक्ष, पम्मी, रोहित कुमार, शशि और रिशु को संयुक्त सचिव, राजकुमार को वित्त सचिव, सुरेश, प्रवीन, श्याम, बलविंद्र, सुरेंद्र को कमेटी सदस्य के रूप में चुना गया है।
